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computer kya hai-  कम्प्यूटर एक मशीन है जो हमारी भाषा नहीं समझती ओर ना ही इसके पास खुद का दिमाग होता है यह यूजर्स द्वारा दिये गय निर्देशों का पालन करती है तो चलिये जानते है computer kya hai-

computer kya hai

आधुनिक इलेक्ट्रोनिक कम्प्यूटर को हम इस प्रकार से परिभाषित कर सकते हैं कि वह सिस्टम, जोकि सूचनाओं के आधार पर इनपुट के रूप में लोजिक/गणितीय कार्य तथा आउटपुट के रूप में परिणाम या उत्तर प्रदान करता हो, कम्प्यूटर कहलाता है।

- दूसरे रूप में computer kya hai इस प्रकार से samajh सकते हैं कि एक मशीन जोकि इनपुट के रूप में डाटा स्वीकार करती हो, स्टोर और नियंत्रित करती हो और अंत. में आउटपुट के रूप में परिणाम देती है, उस मशीन को कम्प्यूटर कहते हैं

कम्प्यूटर की आधारभूत संरचना

कम्प्यूटर शब्द कम्प्यूट से आया है, जिसका मतलब होता है-केल्कूलेट (गणना) करना। इसलिए कम्प्यूटर एक गणक डिवाइस को इंगित करता है जोकि अंकीय गणना को बहुत तेज गति से संपादित करता है।

आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है। कम्प्यूटर्स के लिए यह सही कहा गया है कि कम्प्यूटर एक वह डिवाइस है, जो सही और तेज गति से वही गणना करता है, जोकि एक व्यक्ति चाहता है।
निश्चित ही कम्प्यूटर एक तेज गति से गणना करने वाली मशीन है। लेकिन आजकल कम्प्यूटर पर 80% कार्य अगणितीय और अ-अंकीय होते हैं।

कम्प्यूटर को न्यूमरिक गणना के आधार पर एक गणितीय डिवाइस कहते हैं तो इसके 80% कार्य को इग्नोर (छोड़ना) करना पड़ेगा क्योंकि कम्प्यूटर में वर्तमान युग में कम्प्यूटर पर किए जाने वाले कार्यों का 80% कार्य ग्राफिक्स एवं मल्टीमीडिया से संबधित होता है। 

कम्प्यूटर/केल्कुलेटर 
जैसा कि हम सभी जानते हैं कि केल्कूलेटर केवल अंकगणित की जटिलतम गणनाओं को ही संपादित कर सकता है। 

इसमें की गई गणनाओं को भविष्य में दुबारा आवश्यकता पड़ने पर वापस कार्य में नहीं लिया जा सकता। साथ ही केल्कूलेटर के द्वारा तार्किक गणनाऐं नहीं की जा सकती। 

यहाँ तार्किक का तात्पर्य है कि राम और श्याम में से कौन बड़ा है। इस प्रकार के निर्णय प्रोसेसिंग कर केल्कूलेटर द्वारा निर्धारित नहीं किये जा सकते तथा शब्दों से सम्बन्धित किसी भी प्रकार गणना/प्रोसेसिंग केल्कूलेटर में नहीं की जा सकती।

जबकि एक कम्प्यूटर में की गई गणनाओं को मेमोरी में लिख कर भविष्य में उपयोग किया जा सकता है। कम्प्यूटर में शब्दों को भी प्रोसेस किया जा सकता है। 

साथ ही तार्किक (लोजिकल) गणनाऐं भी कम्प्यूटर के द्वारा संपादित की जा सकती हैं।

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कम्प्यूटर एप्लीकेशन्स:

कम्प्यूटर जीवन के प्रत्येक भाग में काम आता है। उदाहरण के लिए स्वचालित -कम्प्यूटर उद्यमिता को नियंत्रित करने के लिए काम में लिया जाता है। 

किसी भी व्यक्ति के लिए औद्योगिक प्रोसेस और सूचनाओं को याद रखना बिल्कुल असंभव हैं। डिजिटल कम्प्यूटर निश्चितता और आसानी के साथ तुलना, व्यवस्था, गणना और विभिन्नताओं के साथ मूल्यांकन करता है। इन सभी कार्यों को यह अल्प समय में कर सकता है।



कम्प्यूटर एप्लीकेशन के उदाहरण :

1. कठिन गणितीय और लोजिक संख्याओं को हल करना 
2. गणितीय सारणियों की गणना तथा प्रिन्टिंग 
3. डायग्नोजिंग और मॉनीटरिंग करना और सूचनाएं देना
4. मौसम की जानकारी  वेब, कम्प्यूटर-एडेड डिजाइनिंग आदि
6. औद्योगिक मिलों की भारी मशीनरियों की ऑपरेटिंग और कन्ट्रोलिंग करना। 
7. रोबोट के द्वारा स्वचालित तरीके से फेक्ट्रियों का संचालन (नियंत्रण) करना। 
8. किताबें, मेग्जीन और अखबारों की रचना और उत्पादन। 
9. एयरलाइन्स के टिकिट आरक्षण में। 
10. टेलीफोन एक्सचेंज में
11. और बहुत से क्षेत्र हैं जिनके बारे में हम सोच सकते हैं। 


कम्प्यूटरीकरण के विभिन्न उद्देश्य और विशेषताएं : 

1. गति:
डिजिटल कम्प्यूटर्स की गति वास्तव में तेज होती है-ये करोड़ो क्रियाएँ प्रति सेकिण्ड में प्रतिपादित कर सकते हैं। ये कम्प्यूटर्स उन समस्याओं को कुछ ही घंटों में हल कर देते। हैं, जिनको हल करने में आपको कई दिन अथवा महीने लग सकते हैं। 

2. संचय (स्टोर):

कम्प्यूटर मुख्य सूचनाओं को स्टोरेज और ऑक्जलरी स्टोरेज में संचित करने की | क्षमता रखता है। पूरे शब्दकोष को एक कॉम्पेक्ट डिस्क में स्टोर किया जा सकता है।
- कम्प्यूटर की मेमोरी का निर्धारण 'K' के द्वारा होता है। 1K = 210 = 1024 स्टोरेज या मेमोरी लोकेशन।

 हम यह मान सकते हैं कि एक कम्प्यूटर का स्टोरेज मेमोरी क्षेत्र 64K शब्द का है, जो बताता है कि एक शब्द की लम्बाई = 36 बिट्स है। इसके लिए हम निम्न | गणना कर सकते हैं
= 64 शब्द
= 64x1024 शब्द
= 64 x 1024 x 36 बिट्स
= 2, 359, 296 बिट्स

 3. निश्चितता:

जहाँ निश्चितता का विषय आता है तो कम्प्यूटर ही सबसे उचित साधन होता है। जब कम्प्यूटर में कोई एरर आ जाती है तो यह बताता (सूचना देता) है कि डाटा सही निर्दिष्ट नहीं हुए हैं, जोकि किसी टेक्नीकल कमी से भी हो सकते हैं।

4. क्रमबद्धता :
विभिन्न कार्यों में कम्प्यूटर बताता है कि किसी भी निर्देश को सही तरीके से किस चरणबद्ध तरीके से लोजिकल प्रकार से किया जाए।
जब एक कम्प्यूटर में चरणबद्ध तरीके से कोई प्रोग्राम निर्दिष्ट किया जाता है तो यह दिये हुए निर्देशों का जब तक पालन करता रहता है, जब तक जरूरी होता है।
कम्प्यूटर एक ऐसी मशीन है, जो कभी नहीं थकती है। कम्प्यूटर यदि 24 घंटे लगातार कार्य करता रहे तो भी इसमें कोई अन्तर नहीं आता। अर्थात् जब कम्प्यूटर को स्टार्ट किया जाता है और बन्द किया जाता है, तब तक इसकी प्रोसेसिंग क्षमता और निश्चितता में कोई अन्तर नहीं आता। 

जबकि एक आदमी ऐसा नहीं कर सकता क्योंकि वह थक जाता है, ऊब जाता है, गलतियां करने लगता है आदि।


कम्प्युटर के कुछ उपकरण 


प्रोसेसर : इसको कम्प्युटर का दिमाग भी कहा जाता है इसकी स्पीड मेगा अथबा गीगा हर्ट्स (MHZ,GHZ) में मापी जाती है 

मदरबोर्ड : मदरबोर्ड कम्प्यूटर का मेन बोर्ड होता है, जिस पर लगने  वाले अन्य डिवाइसेस कनेक्ट होते हैं। प्रोसेसर की स्पीड़ अनुसार ही इसका चयन किया जाता है।

RAM (Randam Access Memory) :  जहां आपके प्रोग्राम्स रहते हैं अथवा चलते है, हार्डडिस्क में लिखी गई सूचनाओं को यदि प्रोसेसर को प्रोसेस करना है तो सर्वप्रथम ये सभी सूचनाएं इसी मेमोरी में स्थानान्तरित की जाती हैं, उसके पश्चात ही प्रोसेसर द्वारा ये सूचनाएं प्रोसेस की जा सकती हैं। 

अतः यह आवश्यक जाता है कि मेमोरी का साइज उपयोग में लिये जाने वाले प्रोग्राम अथवा सॉफ्टवेयर के लिए उपयुक्त हो। 

 हार्ड डिस्क : 
यह वह स्थान होता है, जहां पर कम्प्यूटर में प्रोग्राम   और आपका डाटा, जोकि समय-समय पर काम में लिया जायगा, लिखा अथवा स्टोर किया जाता है। 

यह भी एक तरह से मेमोरी का ही भाग होता है लेकिन इसमें लिखी गई सूचनाएं एक बार लिखने के पश्चात सदैव स्थिर रहती हैं, जबकि रैम में लिखी सूचनाएं कम्प्यूटर के ऑफ होते ही समाप्त हो जाती हैं।

मॉनिटर : 
बर्तमान समय में बहुत सारी कंपनी ओर साइज़ के मॉनिटर मार्केट में है यह आपके बजट पर निर्भर है की कोन सा मॉनिटर लेना है


की-बोर्ड : 
की-बोर्ड सबसे अधिक प्रयोग में आने वाला इनपुट डिवाइस है। यह प्रत्येक प्रकार के कम्प्यूटर के साथ काम में लिया जाता है।

 आजकल कई प्रकार के की-बोर्ड उपलब्ध हैं लेकिन इनमें एक-दूसरे में काफी कम अन्तर होता है। एक कम्प्यूटर का की-बोर्ड टाइप राइटर के की-बोर्ड से काफी कुछ मिलता-जुलता होता है लेकिन कम्प्यूटर की-बोर्ड में कुछ अतिरिक्त कीज होती हैं। 

मुख्यतः आज के बाजार में पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के की-बोर्डों में भिन्नता का मुख्य कारण उसमें पाई जाने वाली की ज की संख्या है। 

माउस : यह एक ऐसा इलेक्ट्रो-मेकेनिकल डिवाइस है, जो हाथ से चलाया जाता है। आज के युग में जब से GUI (Graphical User Interface) का उदय हुआ है, माउस की उपयोगिता बहुत ज्यादा बढ़ गई है। 

यह एक प्वाइन्टिंग डिवाइस के रूप में निम्न कार्यों को करने के लिए प्रयोग में लाया जाता है।
(a) मीनू कमाण्ड को सलेक्ट करने के लि
(b) आइकॉन्स (कर्सर) को चलाने के लिए 
(c) विन्डोज का साइज कम ज्यादा करने के लिए
(d) प्रोग्राम को स्टार्ट करने के लिए
(e) विकल्पों को सलेक्ट करने के लिए। माउस में मुख्यतः दो बटन होते हैं-राइट बटन और लेफ्ट बटन। 

साथ ही एक रोलर भी लगा होता है, जो नेट पर ब्राउजिंग करते समय अधिकतर काम में लिया जाता है

ज्वायस्टिक 

अगर आप गेम्स खेलने के शौकीन हैं तो आपने ज्वायस्टिक का नाम जरूर सुना होगा। ज्वायस्टिक कम्प्युटर पर गेम्स खेलने के काम आता है इससे आपको गेम पर कीबोर्ड ओर माऊस की तुलना में ज्यादा कंट्रोल मिल जाता है

कम्प्यूटर का इतिहास
मानव जीवन के प्रारम्भिक काल में हमारे पूर्वजों को कभी भी इस प्रकार की गणनाओं की आवश्यकता महसूस नहीं हुई, लेकिन बाद में मानव ने सामाजिक समूहों का  निर्माण किया इसके साथ ही गणनाओं की आवश्यकता महसूस हुई।

 इस युग की सर्वप्रथम गणक प्रणाली "बार्टर प्रणाली'' थी। इस प्रणाली में एक वस्तु की तुलना उसकी समतुल्य दूसरी वस्तु से की जाती थी। गणना का यह एक सरलतम तरीका था। 

इसके बाद जैसे-जैसे मानव समाज विकसित होता गया, इसकी आवश्कताओं में वृद्धि होती गई। धीरे-धीरे अंगूली पर एवं उसके बाद विकसित रूप में अबाकस नाम के उपकरण पर गणनाऐं की जाने लगी। यह अबाकस ही दुनिया का प्रथम केल्कूलेटर था।

आविष्कार लगातार चलते रहे। सन् 1642 में फ्रांस के युवा वैज्ञानिक ब्लेज पॉस्कल ने एक मेकेनिकल केल्कूलेटिंग मशीन का आविष्कार किया एवं सन् 1673 में जर्मन गणितज्ञ डॉट फ्राइड विलियम ने इस मशीन में संशोधन कर इसे जोड़, बाकी, गुणा, भाग के अलावा गणित की जटिल संख्याओं के वर्गमूल निकालने के लिए उपयोगी बना दिया। 

सन् 1801 में पंच कार्ड की खोज की गई। इस कार्ड में एक अक्षर को प्रदर्शित करने के लिए होल्स पंच किये जाते थे। उन होल्स की गणना के आधार पर अक्षरों को वापस पढ़ लिया जाता था, जिसके लिए एक मशीन हुआ करती थी, जिसे हम कम्प्यूटर की प्रारम्भिक अवस्था भी कह सकते हैं। 

सन् 1924 में एक कम्प्यूटिंग टेबूलेटिंग रिकॉर्डिंग कम्पनी बनाई। यह कम्पनी “इन्टरनेशनल बिजनेस मशीन कॉर्पोरेशन" अर्थात् IBM के नाम से जानी जाती है।

तो दोस्तों उम्मीद करता हूँ आपको हमारी पोस्ट computer kya hai जरूरपसंद आई होगी






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